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Information : भारत-चीन सीमा विवाद: 45 साल बाद ये नौबत क्यों आई?

Information : भारत-चीन सीमा विवाद: 45 साल बाद ये नौबत क्यों आई?

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भारत और चीन संबंधों के इतिहास में साल 2020 का ज़िक्र भी अब 1962, 1967 और 1975 की तरह ही होगा. वजह साफ़ है भारत-चीन सीमा विवाद में 45 साल बाद इतनी संख्या में सैनिकों की जान गई है.

ऐसा नहीं है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कोई नई बात हो, लेकिन दोनों देशों ने आपसी सहमति से सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों के बीच राजनीतिक रिश्ते बनाए रखते हुए व्यापार और निवेश को लंबे समय तक चलते रहने दिया है.

बीते छह सालों में जब से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली है, 18 बार दोनों देशों के बीच मुलाक़ातें और बातचीत हुई है. इन सब कोशिशों को दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के पहल की तरह से ही देखा गया.इसलिए बीते दो दिनों में सीमा पर हिंसक झड़पों के बाद हर कोई सवाल पूछ रहा है कि आख़िर अचानक ऐसा क्या हुआ? भारत और चीन के बीच बात इतनी क्यों बिगड़ गई कि नौबत हिंसक संघर्ष तक पहुँच गई.

क्या लद्दाख में भारत की ओर से सड़क निर्माण ही चीन की चिंता का सबब है या बात कुछ और ही है.

साल 2018-19 की सालाना रिपोर्ट में भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि सरकार ने भारत-चीन सीमा पर 3812 किलोमीटर इलाक़ा सड़क निर्माण के लिए चिह्नित किया है.

इनमें से 3418 किलोमीटर सड़क बनाने का काम बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाज़ेशन यानी बीआरओ को दिया गया है. इनमें से अधिकतर परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं.

भारत-चीन सीमा विवाद के जानकारों की राय है कि यही निर्माण कार्य दोनों देशों की विवाद की असली वजह है.

हिंदुस्तान टाइम्स में रक्षा सम्बंधी मामले कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं और कहते हैं कि, "पिछले पाँच सालों से भारतीय सीमाओं को बेहतर बनाने पर ज़्यादा ध्यान दिया गया है."

उनके मुताबिक़, "पहले भी सीमा पर दोनों सेनाओं में छोटी-मोटी झड़पें होती रही हैं. डोकलाम के पहले भी 2013 और 2014 में चुमार में ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं. लेकिन इस बार की गतिविधियों का दायरा ख़ासा बड़ा है."

पूर्व मेजर जनरल अशोक मेहता ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बढ़ती कथित चीनी गतिविधियों का बड़ा कारण, "पुल और हवाई पट्टियों का निर्माण बताया जिसकी वजह से भारतीय गश्तें बढ़ चुकी हैं."

उनके मुताबिक़ इस तनाव के पीछे कई मामले आपसे में एक दूसरे से जुड़े हैं. वो कहते हैं कि हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के ख़ास दर्जे को ख़त्म कर दो नए केंद्र शासित प्रदेशों के नक़्शे ज़ारी किए तो चीन इस बात से ख़ुश नहीं था कि लद्दाख के भारतीय क्षेत्र में अक्साई चिन भी था."

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